क्या कृष्ण वास्तव मे यादव थे या क्षत्रिय थे? – Krishna – Yadav or Kshatriya?

अनेक बार यह उल्लेख आता है कि कृष्ण यदुवंशी थे, यादव थे. आम धारणा यह है कि वसुदेव का पुत्र होने के कारण क्षत्रिय थे परंतु नन्द परिवार मे पालन पोषण होने के कारण यादव भी माने जाते हैं. परंतु सत्य यह नही है

नन्द परिवार यादव नहीं था, वह तो ग्वाल थे, नन्दगोप ग्वालों के प्रमुख थे. आयेज जानिये कि यादव कौन थे.

यादवो के आरम्भ के बारे में जानने के लिए हमें भागवत पुराण में जाना पड़ेगा.
चन्द्र वंश में प्रसिद्ध राजा ययाति (नहुष के पुत्र) हुए हैं. ययाति एक बार अशोक वन में शुक्राचार्य की बेटी देवयानी से मिले और दोनों ने एक दुसरे को पसंद किया. शुक्राचार्य की सहमति से दोनों का विवाह हो गया.

देवयानी की मित्र और असुर पुत्री शर्मिष्ठा भी देवयानी के साथ खेलती थी और उनकी बहुत गहरी मित्रता थी. विवाह के समय शर्मिष्ठा को दहेज़ के रूप में देवयानी के साथ खेलने के लिए दे दिया गया परन्तु शुक्राचार्य ने चेतावनी दी कि ययाति शर्मिष्ठा से विवाह नहीं करेगा

शर्मिष्ठा को एक अशोक वाटिका में स्थान दे दिया गया जबकि देवयानी महल में रह रही थी. इस बीच वह भी राजा को पसंद करने लगी थी. एक दिन राजा ययाति के वहां से निकलते समय उसने अपने मन की बात कह दी और देवयानी को बिना बताये दोनों ने विवाह कर लिया.

देवयानी के 2 बेटे और शर्मिष्ठा से 3 बेटे हुए. एक दिन देवयानी को यह पता चल गया और उसने यह बात अपने पिता को बता दी. तब उन्होंने ययाति को शाप दे दिया की वह अभी बूढा हो जाये और सारी शक्ति क्षीण हो जाये.

शुक्राचार्य ने कहा की अगर उनका कोई पुत्र उनकी वृद्धावस्था लेले और बदले में अपनी जवानी देदे तो वह फिर से जवान हो सकते हैं. इसके बाद ययाति ने पुत्रों के सामने प्रस्ताव रखा कि जो उसे अपनों जवानी देगा उसे ही राज्य मिलेगा.

सबसे छोटे बेटे पुरु ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. कुरुवंश (कौरव पांडव) इन्ही के वंशज हुए हैं. सबसे बड़े बेटे यदु ने अपना अलग राज्य स्थापित कर यदुवंश की स्थापना की. वसुदेव यदु के ही वंशज थे, इसलिए यादव भी क्षत्रिय हैं

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